गुरुवार, 6 मई 2010
शनिवार, 24 अप्रैल 2010
राजस्थानी रचनाकारां सारू सूचना
राजस्थानी रचनाकारां सारू सूचना
राजस्थानी जन-जन ताईं पूगै इण सारू बोधि प्रकाशन पुस्तक पर्व योजना रै तै'त 'राजस्थानी साहित्य माळा' छापण री तेवड़ी है। इण योजना में राजस्थानी रा दस रचनाकरां री एक-एक पोथी रो सैट ऐकै साथै प्रकाशित होय सी। ऐ दस पोथ्यां कहाणी, नाटक, एकांकी, लघुकथा, संस्मरण, व्यंग्य, रेखाचित्र, निबंध, कविता, गज़ल आद विधा में होय सी। साफ है एक विधा में एक टाळवीं पोथी। कुल दस पोथी रै एक सैट री कीमत 100/- (सौ रिपिया) होय सी। इण पोथी माळा रो संयोजन राजस्थानी रा चावा साहित्यकार श्री ओम पुरोहित 'कागद' नै थरपियो है।
योजना में सामल होवण सारू 15 मई, 2010 तक इण ठिकाणै माथै रुख जोड़ो-
श्री ओम पुरोहित 'कागद'
24, दुर्गा कॉलोनी, हनुमानगढ़ संगम-335512
खूंजै रो खुणखुणियो : 9414380571
बोधि प्रकाशन
एफ-77, सेक्टर-9,
रोड नं.-11, करतारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया,
बाईस गोदाम, जयपुर
24, दुर्गा कॉलोनी, हनुमानगढ़ संगम-335512
खूंजै रो खुणखुणियो : 9414380571
बोधि प्रकाशन
एफ-77, सेक्टर-9,
रोड नं.-11, करतारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया,
बाईस गोदाम, जयपुर
लेबल:
बोधि प्रकाशन,
राजस्थानी
रविवार, 28 मार्च 2010
परलीका के प्रगतिशील किसान लालसिंह बैनीवाल पुरस्कृत
परलीका के प्रगतिशील किसान लालसिंह बैनीवाल पुरस्कृत
25 हजार का पुरस्कार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदान किया
फोटो- जयपुर के पंत कृषि भवन में लालसिंह को पुरस्कृत करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कृषि मंत्री हरजीराम बुरडक
शनिवार, 20 मार्च 2010
जिंदगी में रस घोल दिया शहद ने
परलीका (हनुमानगढ़). हनुमानगढ़ जिले के परलीका व रामगढ़ गांवों के किसानों व शिक्षित युवकों का रुझान मधुमक्खी पालन की ओर बढ़ रहा है और इलाके के करीब एक दर्जन नौजवानों ने इसे व्यवसाय के रूप में अपनाया है। युवा किसानों के अनुसार यह व्यवसाय किसानों के लिए काफी लाभप्रद साबित हो रहा है और शहद ने उनकी जिंदगी में रस घोल दिया है।
परलीका में इसकी शुरुआत प्रगतिशील युवा किसान मुखराम सहारण ने की। वे वर्ष 2005 से लगातार शहद उत्पादन कर रहे हैं। शुरू में जानकारियों के अभाव में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा, मगर बाद में कृषि एवं उद्यान विभाग व कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा उपलब्ध सुविधाओं तथा प्रशिक्षण से यह व्यवसाय काफी आसानी से होने लगा है। मुखराम से व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर इसी गांव के युवक सतवीर बैनीवाल तथा नरेश जांगिड़ ने भी इस व्यवसाय को अपनी आजीविका का साधन बनाया है। समीपवर्ती रामगढ़ ग्राम में युवक मीठूसिंह, सज्जन राहड़, सुरेन्द्र भाम्भू, बगड़ावतसिंह भाम्भू, पवन नैण आदि भी पूर्ण सफलता के साथ शहद उत्पादन कर रहे हैं। इन किसानों के पास मधुमक्खियों के 200 से अधिक बक्से हैं जिन्हें अब तक सरसों के खेतों में रखा गया था और अब हरियाणा के किन्नू-माल्टा बागानों में भेज दिया गया है।
शहद उत्पादकों के अनुसार राज्य सरकार की ओर से दिया जाने वाला अनुदान व अन्य सुविधाएं अपर्याप्त हैं तथा राज्य सरकार की उदासीनता से यह व्यवसाय अधिक प्रगति नहीं कर पा रहा है। सरकार अगर पर्याप्त सहयोग करे और सम्बन्धित उपकरण व तकनीकों की जानकारी उपलब्ध करवाए तो इस व्यवसाय से शहद के साथ-साथ मोम, रायलजैली, मोनोविष आदि का भी उत्पादन सम्भव है।
हो चुकी हैं। इस क्षेत्र में बीटी कपास के क्षेत्रफल में वृद्धि होने से कीटनाशकों का प्रयोग 30 प्रतिशत तक कम हुआ है, जिस कारण से इस व्यवसाय को भी अपरोक्ष रूप से अच्छा लाभ हुआ है और शहद का उत्पादन भी बढ़ा है। इस वर्ष शहद के भाव बढऩे से भी उत्पादकों का हौसला बढ़ा है। उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र किसानों के लिए मधुमक्खी पालन पर प्रतिवर्ष पांच दिवसीय नि:शुल्क प्रशिक्षण शिविर आयोजित करता है। इसी प्रकार उद्यान विभाग प्रति बक्से पर 400 तथा प्रति कॉलोनी 350 रुपयों का अनुदान भी देता है।
''मधुमक्खी पालन एक लाभप्रद रोजगार है, जिसे खेतीबाड़ी के साथ-साथ सहायक धन्धे के रूप में भी अपनाया जा सकता है। इस व्यवसाय से मधुमक्खी पालक को जहां आर्थिक लाभ होता है, वहीं आस-पास के किसानों की फसलों में मधुमक्खियों द्वारा होने वाले प्राकृतिक परागण से 10 से 20 फीसदी तक अतिरिक्त उत्पादन होता है।''
न साबित होयो है। कई नौजवान साथी ईं काम नै मिलगे कर सकै। बेरोजगारी गै जमानै में आज हाथ पर हाथ धरगे बैठणै गी बजाय ईं तरियां गा रोजगार करणा चइयै।''
''मधुमक्खी प्रकृति के अनमोल खजाने को बटोरकर हमें पेश करती है। मधुमक्खी प्रकृति के फूलों से मकरन्द एकत्र कर शहद, रायलजैली, मोम व मोनोविष आदि उपलब्ध कराती है जो कि आर्थिक रूप से लाभकारी है तथा स्वास्थ्य के लिए भी लाभप्रद है।''
Read more...
परलीका में इसकी शुरुआत प्रगतिशील युवा किसान मुखराम सहारण ने की। वे वर्ष 2005 से लगातार शहद उत्पादन कर रहे हैं। शुरू में जानकारियों के अभाव में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा, मगर बाद में कृषि एवं उद्यान विभाग व कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा उपलब्ध सुविधाओं तथा प्रशिक्षण से यह व्यवसाय काफी आसानी से होने लगा है। मुखराम से व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर इसी गांव के युवक सतवीर बैनीवाल तथा नरेश जांगिड़ ने भी इस व्यवसाय को अपनी आजीविका का साधन बनाया है। समीपवर्ती रामगढ़ ग्राम में युवक मीठूसिंह, सज्जन राहड़, सुरेन्द्र भाम्भू, बगड़ावतसिंह भाम्भू, पवन नैण आदि भी पूर्ण सफलता के साथ शहद उत्पादन कर रहे हैं। इन किसानों के पास मधुमक्खियों के 200 से अधिक बक्से हैं जिन्हें अब तक सरसों के खेतों में रखा गया था और अब हरियाणा के किन्नू-माल्टा बागानों में भेज दिया गया है।
शहद उत्पादकों के अनुसार राज्य सरकार की ओर से दिया जाने वाला अनुदान व अन्य सुविधाएं अपर्याप्त हैं तथा राज्य सरकार की उदासीनता से यह व्यवसाय अधिक प्रगति नहीं कर पा रहा है। सरकार अगर पर्याप्त सहयोग करे और सम्बन्धित उपकरण व तकनीकों की जानकारी उपलब्ध करवाए तो इस व्यवसाय से शहद के साथ-साथ मोम, रायलजैली, मोनोविष आदि का भी उत्पादन सम्भव है।
हनुमानगढ़ जिले में 150 इकाइयां स्थापित
कृषि विज्ञान केन्द्र संगरिया के विषय विशेषज्ञ (पौध संरक्षण) डॉ. उमेश कुमार का कहना है कि हनुमानगढ़ जिले में मधुमक्खी पालन की लगभग 150 इकाइयां स्थापित --------------------------------------
''मधुमक्खी पालन एक लाभप्रद रोजगार है, जिसे खेतीबाड़ी के साथ-साथ सहायक धन्धे के रूप में भी अपनाया जा सकता है। इस व्यवसाय से मधुमक्खी पालक को जहां आर्थिक लाभ होता है, वहीं आस-पास के किसानों की फसलों में मधुमक्खियों द्वारा होने वाले प्राकृतिक परागण से 10 से 20 फीसदी तक अतिरिक्त उत्पादन होता है।''-सज्जन राहड़, मधुमक्खी पालक, रामगढ़।
------------------------------------
''मैं घणो पढेड़ो कोनी, पण मेरै खातर ओ रोजगार वरदा-मुखराम सहारण, मधुमक्खी पालक, परलीका।
----------------------------------
-नरेश जांगिड़, मधुमक्खी पालक, परलीका।
फोटो- 1. परलीका में बक्सों से शहद निकालते हुए मधुमक्खी पालक। 2. डॉ. उमेश कुमार 3. सज्जन राहड़ 4. मुखराम सहारण 5. नरेश जांगिड़।रिपोर्टर : अजय कुमार सोनी
शुक्रवार, 29 जनवरी 2010
सोमवार, 11 जनवरी 2010
मंगलवार, 29 दिसंबर 2009
शुक्रवार, 18 दिसंबर 2009
बुधवार, 16 दिसंबर 2009
श्याम जांगिड़ को फोरेंसिक साइंस में जेआरएफ
परलीका के श्याम जांगिड़ को फोरेंसिक साइंस में जेआरएफ
परलीका. यहां के प्रतिभावान युवक श्याम जांगिड़ का विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की जूनियर रिसर्च फैलोसिप के लिए चयन हुआ है। श्याम ने आयोग की ओर से जून 2009 में आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा में फोरेंसिक साइंस विषयांतर्गत भाग लिया था, जिसका परिणाम सोमवार को घोषित हुआ है। गौरतलब है मध्यप्रदेश के डॉ. हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय, सागर में फोरेंसिक साइंस विषय में एमएससी की राजस्थान राज्य की एकमात्र सीट के कोटे पर वरीयतानुसार वर्ष 2007 में श्याम का प्रवेश हुआ था। श्याम ने इस वर्ष विश्वविद्यालय के सैकण्ड टॉपर विद्यार्थी के रूप में एमएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की है। एमएससी के दौरान ही इस युवक ने दिसम्बर 2008 में आयोजित यूजीसी की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) भी उत्तीर्ण की। तेइस वर्षीय श्याम इन दिनों जयपुर के एक विश्वविद्यालय में अन्वेषण अधिकारी के पद पर कार्यरत है। गांव के इस युवक की इस उपलब्धि पर ग्रामीणों ने प्रसन्नता व्यक्त की है।
-अजय सोनी, परलीका।
Read more...
मंगलवार, 24 नवंबर 2009
सदस्यता लें
संदेश (Atom)








