शनिवार, 16 अगस्त 2008

मनुज देपावत रो गीत

धोरा आला देश जाग रे, उन्ठा आला देश जाग
छाती पर पेना पड्या nag रे धोरा आला...........

उठ खोल उनींदी aankharlya, नेना री मीठी नींद तोड़
रे रतअत नही अब दिन उग्यो, सपना रो कूडो मोह छोड़
thari aankhya में naach reya janjal suhani rata र
तू कोट बनावे उन जुनोडे जुग री बोदी बाता र
रे बीत गयो सो गयो बीत, अब उनरी कुड़ी आस छोड़

छाती पर पेना पड्या ............................................

खागा रे लाग्यो आज काट, खूंटी पर टंगिया धनुष तीर
रे लोग मरे भूखा मरता, फोगा में रुलता फिरे वीर
रे utho kisana मजदूर, थे उन्ठा पर कस्ल्यो आज जिन
इ न्फखोर अन्यया ने करदो कोडी रत तिन तिन
फेन किचर कलिए संपा रो तू आज मिटा दे जहर झाग

छाती पर पेना................................................

रे देख मिनख मुरझाय रियो मरने सु मुश्किल है जीनो
ऐ खड़ी हवेल्या हँसे आज पण झुम्पद्ल्या रो दुःख दुनो

ऐ धनाला थारी काया रत भक्षक बनता जावे है
रे जाग खेत रत रुन्खला आ बाद खेत ने खावे है
ऐ जिका उजारे झुम्पद्ल्या उन महला रे लगा आग
छाती पर पेना पड्या नाग ..............................

ऐ इन्कलाब रत अंगारा सिल्गावे दिल री दुखी हाय
पण चांटा छिड़का नही बीउझेली डूंगर lagi aaj lay
ab din aavelo ek isyo dhora ri dharti dhujela
e sada pathra ra sevak ve aaj minakh ne pujela
i sada surange marudhar ra sutora jage aaj bhag
chati par pena padya nag......................................

1 टिप्पणियाँ:

RAJ BIJARNIA 19 अगस्त 2008 को 6:00 am  

लाडेसर अजय,
मनुज देपावत रो गीत घणो दाय आयो ! जनवाणी सारु घणी-घणी बधाई !!
खाओ-पीओ , मौज करो !!!
-राज बिजारनियाँ

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