गुरुवार, 9 अक्टूबर 2008

बधाई संदेश..............


भारतीय खाद्य निगम द्वारा सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई।

नरेश मेहन (हनुमानगढ़) हिन्दी के प्रमुख जनवादी कवि है। प्रकृति प्रेम इनकी कविताओ की खूबी है। आपके दो कविता संग्रह प्रकाशित है-
१- पेड़ का दुःख, २- घर।
बाल कथा कृति 'खेजडी बुआ' भी प्रकाशित हुयी है। आपने अपनी मासूम मुलायम भावः बोध की कविताओ से साहित्य जगत में खूब प्रसिद्धि पाई है।


जनवाणी परिवार की ओर से कवि नरेश मेहन को हार्दिक बधाई।

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रविवार, 14 सितंबर 2008

परलीका गांव के साहित्यकार..............


विनोद स्वामी


रामस्वरूप किसान


मेहरचंद धामू


सत्यनारायण सोनी

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पेड़ों के पालनहार लादू दादा.......





लादू दादा , लादू दादा
रोज लगाते पेड़ लादू दादा
सबके प्यारे लादू दादा
बचो के प्यारे लादू दादा
हमको रोज कहते बचो एक पेड़ जरुर लगाना।

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शुक्रवार, 12 सितंबर 2008

जनवाणी की वेबसाइट का लोकार्पण दिनाक ११ सितम्बर २००८


जनवाणी परलीका की वेबसाइट लॉन्च करते हुए समाजसेवी सतवीर स्वामी, लाल सिंह बेनीवाल, मेहरचंद धामु, रामस्वरूप किसान, पञ्जाबी के प्रसिद्ध कवि हरिभजन सिंह रेणु।

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गुरुवार, 11 सितंबर 2008

गांव की शान प्रगतिशील किसान लाल सिंह बेनीवाल


२० एन.टी.आर (परलीका) के प्रगतिशील किसान श्री लाल सिंह बेनीवाल कृषक जगत में नवाचारों की अनोखी नजर के नायक है। कम पानी में अधिक उत्पादन लेते हुए पानी की बचत कर खेती के अत्याधुनिक तोर तरीको को अपनाया। जिला व राज्य स्तर पर अनेक पुरस्कार व प्रशंसा पत्र प्राप्त श्री लाल सिंह को केंद्रीय कपास अनुसन्धान केन्द्र नागपुर द्वारा २५००० रूपये का नकद पुरस्कार भी दिया जा चुका है।

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मंगलवार, 9 सितंबर 2008

जनवाणी लोगो


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शुक्रवार, 22 अगस्त 2008

करनीदान बारहठ की फोटो

करनीदान बारहठ हनुमानगढ़ जिले के फेफाना गांव के निवासी थे

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गुरुवार, 21 अगस्त 2008

रपट

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जनवाणी का प्रथम अंक


जनवाणी का प्रथम अंक दिनाक २७ सितम्बर २००७

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मंगलवार, 19 अगस्त 2008

मनुज देपावत रो गीत- जद झुके शीश

जद झुके शीश नीचा व्हे नेण धरती रो कण कण शर्मावे
वां कायर कीट कपूता री कवि कथा सुनावन ने जावे
अम्बर री आंख्या लाज मरे धरती लजखानी पड़ जावे
जद .......................................................................

भेरी रो रन में नाद हुवे मतवाला खांगा खंकावे
माँ वशुंधरा हित जंग छिड़े वीरा रो जोश उफन आवे
अन्तेर री ज्वाला जग उठी उठे राग राग में बिजली दोड़ पड़े
jhan jhana uthe man ree वीणा अरु आंख्या सू अंगार चिद्दे
पण हार मौत री मंदी देख मतवाला मन में घबरावे
जीवन री चिंता आन पड़े प्राणा रो मोह नही जावे
singha री झपटा jhelniya minki रे dola डर जावे
जद ....................................................................

बे rajmahal रस भोग भवन vebhav vilas में chur adya
jyu manvata री chati पर दानव रा निष्ठुर पैर पद्य

महला में बेठो मौज करे बो राज काज रो रखवालो
रोटी री मांग करे जग में सिने पर सहन करे गोली
ऊँचे महला री चाय में बाण भूखो री दुनिया भोली
ले फौज पुलिस रा बाजीगर ले साधन मोटर ट्राम रेल
आ सदका रो फुटपाथ पर कर रही त्रिघट एक खेल
बो खेल जीके में मानवता कठपुतली बन कर नाच उठे
वे मांस रा बनया पिंड लकड़ी रा घोड़ा बन जावे
सहकर हंटर री मार "मनुज" मुस्कान बिखेरिया खाद्यों रहे
सहकर खूंटे पर खाद्यों रहे पथ पर पत्थर ज्यो पड्यो रहे
बहना री इज्जत लूट दनुज नित अट्टहास करतो जावे
जद .........................................................................

बे घिसी वयवस्था रा प्रेमी बे शोषक सत्ता रा हामी
वे लंबा तिलक लगावानिया है कटीटी रा कोत्ता कमीआमी
सोने चंडी रे टुकडा पर मनवा इज्जत रो मॉल करे
तन रो तंवअन्वे सू टोल करे
मन बिक ज्यावे तन बिक ज्यावे जीवन रो सोरभ लूट जावे
रह जाये मानवी yoni मात्र पण उन् भूखे मन री ब भूख
नही बुझान पावे
जद ................................................................................

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