मंगलवार, 11 मई 2010

मनुज देपावत रो जन-गीत "धोरां वाला देश जाग रे"

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गुरुवार, 6 मई 2010

'मुळकती माटी' बणी सिरताज


नेठराना गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्राध्यापक (राजनीति विज्ञान) पद पर कार्यरत जितेन्द्र कुमार सोनी 'प्रयास' संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2009 में चयनित घोषित हुए हैं। इसी वर्ष अपने प्रथम प्रयास में ही आरएएस पुरुष वर्ग में टॉपर रह चुके सोनी ने आयोग की ओर से गुरुवार को घोषित परिणाम में देशभर में 29 वां स्थान प्राप्त किया है।
रावतसर तहसील के धन्नासर गांव में 29 नवम्बर 1981 को जनमे सोनी ने इस अवसर पर कहा कि उनका बचपन से संजोया हुआ सपना साकार हो गया है तथा ऐसी कोई उपलब्धि नहीं जिसे मेहनत के दम पर प्राप्त नहीं किया जा सकता। यह परिणाम सिद्ध करता है कि राजस्थान और खासकर हनुमानगढ़ जिले में शिक्षा के संदर्भ में बहुत बड़ी जाग्रति आई है और सोनी की इस सफलता से अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी।
सोनी ने सिद्ध कर दिया है कि हिन्दी माध्यम, ग्रामीण पृष्ठभूमि या सरकारी स्कूल में पढ़कर भी सफलता के उच्चतम लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है और अगर कोई इंसान कड़ी मेहनत करता है तो निश्चित तौर पर हर लक्ष्य उसे छोटा नजर आता है।

साहित्यकारों में खुशी का माहौल

स्थानीय साहित्यकार सत्यनारायण सोनी, रामस्वरूप किसान, मेहरचंद धामू व विनोद स्वामी ने सोनी की इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की है। गौरतलब है कि सोनी हिन्दी व राजस्थानी के चर्चित युवा कवि भी हैं तथा इनका कविता संग्रह 'उम्मीदों के चिराग' प्रकाशित हो चुका है। इंटरनेट पर सोनी की राजस्थानी कविताओं का ब्लॉग 'मुळकती माटी' भी काफी चर्चित हुआ है। गत दिनों नई दिल्ली में आयोजित सार्क सम्मेलन में भी सोनी भाग ले चुके हैं तथा अगले वर्ष पाकिस्तान में आयोजित हो रहे विश्व साहित्यकार सम्मेलन में भी इन्हें आमंत्रित किया गया है। सोनी इन दिनों राजस्थान विश्वविद्यालय से 'विकास के गांधीय प्रतिमान' विषय पर पीएच.डी. भी कर रहे हैं।

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शनिवार, 24 अप्रैल 2010

राजस्थानी रचनाकारां सारू सूचना

राजस्थानी रचनाकारां सारू सूचना

राजस्थानी जन-जन ताईं पूगै इण सारू बोधि प्रकाशन पुस्तक पर्व योजना रै तै'त 'राजस्थानी साहित्य माळा' छापण री तेवड़ी है। इण योजना में राजस्थानी रा दस रचनाकरां री एक-एक पोथी रो सैट ऐकै साथै प्रकाशित होय सी। ऐ दस पोथ्यां कहाणी, नाटक, एकांकी, लघुकथा, संस्मरण, व्यंग्य, रेखाचित्र, निबंध, कविता, गज़ल आद विधा में होय सी। साफ है एक विधा में एक टाळवीं पोथी। कुल दस पोथी रै एक सैट री कीमत 100/- (सौ रिपिया) होय सी। इण पोथी माळा रो संयोजन राजस्थानी रा चावा साहित्यकार श्री ओम पुरोहित 'कागद' नै थरपियो है।

योजना में सामल होवण सारू 15 मई, 2010 तक इण ठिकाणै माथै रुख जोड़ो-

श्री ओम पुरोहित 'कागद'
24, दुर्गा कॉलोनी, हनुमानगढ़ संगम-335512
खूंजै रो खुणखुणियो : 9414380571

बोधि प्रकाशन
एफ-77, सेक्टर-9,
रोड नं.-11, करतारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया,
बाईस गोदाम, जयपुर

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रविवार, 28 मार्च 2010

परलीका के प्रगतिशील किसान लालसिंह बैनीवाल पुरस्कृत

परलीका के प्रगतिशील किसान लालसिंह बैनीवाल पुरस्कृत

25 हजार का पुरस्कार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदान किया

यहां के प्रगतिशील किसान लालसिंह बैनीवाल को कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में हनुमानगढ़ जिला स्तर पर उल्लेखनीय कार्य करने पर कृषि विभाग राजस्थान की ओर पुरस्कृत किया गया है। गौरतलब है कि कृषि क्षेत्र में नवीनतम प्रयोग कर विशेष उत्पादन प्राप्त करने पर लालसिंह को पूर्व में भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

रविवार को जयपुर के पंत कृषि भवन में आयोजित राज्य स्तरीय कृषक सम्मान समारोह में लालसिंह को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कृषि मंत्री हरजीराम बुरड़क तथा कृषि राज्य मंत्री भरोसीलाल जाटव ने 25 हजार रुपयों का चैक तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। समारोह में मुंडा (हनुमानगढ़) के अमरसिंह सिहाग को भी 25 हजार का हनुमानगढ़ जिला स्तरीय पुरस्कार तथा भादरा के महावीर सैनी, बोझला (भादरा) के तुलछाराम, बुधवालिया (नोहर) के धर्मवीर सिहाग तथा ढाबां (संगरिया) के कृष्ण जाखड़ को 10-10 हजार रुपयों के पंचायत समिति स्तरीय पुरस्कार प्रदान किए गए।
फोटो- जयपुर के पंत कृषि भवन में लालसिंह को पुरस्कृत करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कृषि मंत्री हरजीराम बुरडक

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शनिवार, 20 मार्च 2010

जिंदगी में रस घोल दिया शहद ने

जिंदगी में रस घोल दिया शहद ने

परलीका क्षेत्र में एक दर्जन युवा किसानों ने बनाया आजीविका का साधन

परलीका (हनुमानगढ़). हनुमानगढ़ जिले के परलीका व रामगढ़ गांवों के किसानों व शिक्षित युवकों का रुझान मधुमक्खी पालन की ओर बढ़ रहा है और इलाके के करीब एक दर्जन नौजवानों ने इसे व्यवसाय के रूप में अपनाया है। युवा किसानों के अनुसार यह व्यवसाय किसानों के लिए काफी लाभप्रद साबित हो रहा है और शहद ने उनकी जिंदगी में रस घोल दिया है।
परलीका में इसकी शुरुआत प्रगतिशील युवा किसान मुखराम सहारण ने की। वे वर्ष 2005 से लगातार शहद उत्पादन कर रहे हैं। शुरू में जानकारियों के अभाव में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा, मगर बाद में कृषि एवं उद्यान विभाग व कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा उपलब्ध सुविधाओं तथा प्रशिक्षण से यह व्यवसाय काफी आसानी से होने लगा है। मुखराम से व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर इसी गांव के युवक सतवीर बैनीवाल तथा नरेश जांगिड़ ने भी इस व्यवसाय को अपनी आजीविका का साधन बनाया है। समीपवर्ती रामगढ़ ग्राम में युवक मीठूसिंह, सज्जन राहड़, सुरेन्द्र भाम्भू, बगड़ावतसिंह भाम्भू, पवन नैण आदि भी पूर्ण सफलता के साथ शहद उत्पादन कर रहे हैं। इन किसानों के पास मधुमक्खियों के 200 से अधिक बक्से हैं जिन्हें अब तक सरसों के खेतों में रखा गया था और अब हरियाणा के किन्नू-माल्टा बागानों में भेज दिया गया है।
शहद उत्पादकों के अनुसार राज्य सरकार की ओर से दिया जाने वाला अनुदान व अन्य सुविधाएं अपर्याप्त हैं तथा राज्य सरकार की उदासीनता से यह व्यवसाय अधिक प्रगति नहीं कर पा रहा है। सरकार अगर पर्याप्त सहयोग करे और सम्बन्धित उपकरण व तकनीकों की जानकारी उपलब्ध करवाए तो इस व्यवसाय से शहद के साथ-साथ मोम, रायलजैली, मोनोविष आदि का भी उत्पादन सम्भव है।

हनुमानगढ़ जिले में 150 इकाइयां स्थापित
कृषि विज्ञान केन्द्र संगरिया के विषय विशेषज्ञ (पौध संरक्षण) डॉ. उमेश कुमार का कहना है कि हनुमानगढ़ जिले में मधुमक्खी पालन की लगभग 150 इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं। इस क्षेत्र में बीटी कपास के क्षेत्रफल में वृद्धि होने से कीटनाशकों का प्रयोग 30 प्रतिशत तक कम हुआ है, जिस कारण से इस व्यवसाय को भी अपरोक्ष रूप से अच्छा लाभ हुआ है और शहद का उत्पादन भी बढ़ा है। इस वर्ष शहद के भाव बढऩे से भी उत्पादकों का हौसला बढ़ा है। उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र किसानों के लिए मधुमक्खी पालन पर प्रतिवर्ष पांच दिवसीय नि:शुल्क प्रशिक्षण शिविर आयोजित करता है। इसी प्रकार उद्यान विभाग प्रति बक्से पर 400 तथा प्रति कॉलोनी 350 रुपयों का अनुदान भी देता है।
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''मधुमक्खी पालन एक लाभप्रद रोजगार है, जिसे खेतीबाड़ी के साथ-साथ सहायक धन्धे के रूप में भी अपनाया जा सकता है। इस व्यवसाय से मधुमक्खी पालक को जहां आर्थिक लाभ होता है, वहीं आस-पास के किसानों की फसलों में मधुमक्खियों द्वारा होने वाले प्राकृतिक परागण से 10 से 20 फीसदी तक अतिरिक्त उत्पादन होता है।''
-सज्जन राहड़, मधुमक्खी पालक, रामगढ़।
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''मैं घणो पढेड़ो कोनी, पण मेरै खातर ओ रोजगार वरदान साबित होयो है। कई नौजवान साथी ईं काम नै मिलगे कर सकै। बेरोजगारी गै जमानै में आज हाथ पर हाथ धरगे बैठणै गी बजाय ईं तरियां गा रोजगार करणा चइयै।''
-मुखराम सहारण, मधुमक्खी पालक, परलीका।
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''मधुमक्खी प्रकृति के अनमोल खजाने को बटोरकर हमें पेश करती है। मधुमक्खी प्रकृति के फूलों से मकरन्द एकत्र कर शहद, रायलजैली, मोम मोनोविष आदि उपलब्ध कराती है जो कि आर्थिक रूप से लाभकारी है तथा स्वास्थ्य के लिए भी लाभप्रद है।''
-नरेश जांगिड़, मधुमक्खी पालक, परलीका।

फोटो- 1. परलीका में बक्सों से शहद निकालते हुए मधुमक्खी पालक। 2. डॉ. उमेश कुमार 3. सज्जन राहड़ 4. मुखराम सहारण 5. नरेश जांगिड़।
रिपोर्टर : अजय कुमार सोनी

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शुक्रवार, 29 जनवरी 2010

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सोमवार, 11 जनवरी 2010

आज्या बेटी प्रेमचंदो (प्रकाश गाँधी)

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मंगलवार, 29 दिसंबर 2009

नयो साल री बधाई

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शुक्रवार, 18 दिसंबर 2009

माय फोटो'ज

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