शनिवार, 21 फ़रवरी 2009

आपणी भाषा-आपणी बात
तारीख-२२/०२/२००९

सासू बिना किसो सासरो

अर मां बिनां किसो पी'र


महाजन रा रैवासी श्रीमती स्वाति लढा अर्थशास्त्र में एमए है। मायड़भाषा मानता आंदोलन सूं गहरोजु़डाव। सामाजिक सरोकारां सूं जु़ड्या आपरा आलेख पत्र-पत्रिकावां में छपता रैवै। आज बाँचो, आं री कलम री कोरणी- ओ खास लेख।

-स्वाति लढा


पुराणै जमानै रा लोग जिकी बातां कैयग्या, बां रो सांच-मांच गैरो अर सही अरथ हुवै। जियां आ बात ई साव साची है- 'सासू बिना किसो सासरो अर मां बिनां किसो पी'र'। रामजी म्हाराज री किरपा सूं म्हारै तो सासू अर मां दोनूं ई है। अर भगवान सूं आ ई अरदास करूं कै दोन्यां री उमर लाम्बी करै।
जे सासू सा घरां रैवै तो डर अर संको रैवै। 'जिवड़ा, अबै तो उठ जावां, सासूजी जागग्या।' 'फलाणो काम बां भोळायो है जे नीं करस्यां तो लड़सी।' इसी ई बातां रो सगळै दिन डर खायां जावै। कैबा चालै- फोग आलो ई बळै अर सासू सूधी ई लड़ै। म्हारा सासू लड़ै तो है तो पण बां रै लड़णै में म्हारो हित है। बां रो हेत है। जे कीं नुकसाण हुय जावै तो ई घणो डर लागै। 'सासूजी लड़सी जे म्हारै सूं घी एक मिरकली ई ढुळग्यो तो।' 'गेऊं कोठी में घालां तो सावळ घालां, जे दाणा बिखरग्या तो लड़सी।' इसी ई बातां रो सगळै दिन डर खायां जावै। अबै कीं कैवैला! अबै कीं कैवैला! इण डर रै कारण घर रो नुकसाण नीं होवै। सावचेती राखीजबो करै। जे सासू थोड़ा दिनां वास्तै घर भळाय'र आपरै पी'र गया परा तो जणां पछै देखो। आज कुण कैवै- फलाणकी बहू, उठो, चाय बणाय'र द्यो! आज तो कीं डर-भौ ई कोनी। मरजी आवै जणां ई उठो। मरजी आवै जियां ई करो। कुण चोखै काम करियोड़े नै सरावै अर कुण भूंडै नै बिसरावै? चालो, सगळो काम-काज निवे़ड'र दोपार में घंटैक पड़ ज्यावां कमरै में जा'र। सासूजी घरां होवै तो बारलै कमरै में पोढ्या रैवै। कोई आवै-जावै तो बै ई जाणै। आज सगळो घर जाणै माथै आय पड़्यो। थोडीक देर में ठा पड़ी कै काकीजी आयग्या- 'सा, म्हानै फलाणी चीज उधार द्यो, काल-परस्यूं तांईं पाछी कर देस्यां।' आ किसीक तूमत! हां करी तो मरया अर नां करी तो ई मरिया। जे अबार सासूजी घरां हुवै तो म्हानै कांई मुतलब! बै जाणै बां रो राम जाणै। सांच-मांच सासूजी घरां नीं है तो किसीक गिरै आयगी है। लोगां साची कैयी है- 'सासू बिना किसो सासरो!'
अबै मां कानी अर पी'र कानी देखल्यो। मां हुवै जणै आंख्यां फाड़'र उडीकै- आज म्हारी लाडेसर घरां आवैली! जावां जणै- 'बाई ऐ तूं तो थकगी घणी। सावळ खाया-पीया कर। लै, तनै ओ भावै तो ओ बणा'र द्यूं, बो बणा'र द्यूं। भोजाई भलां ई उठो, मत उठो पण मां उठ'र बणासी।
'मां, म्हैं फलाणी सहेली कनै जा'र आऊं!' तो माऊ कैवै, काल तो आई है बाई, हाल तो बातां ई कोनी करी, सहेली कनै पछै जाज्यै।' 'मां, जावण द्यो नीं!' 'हां, थांनै घूमणो ई चोखो लागै, बाई, सासरै में कांईं निहाल करती हुवैला?' ऐ ल्यो, ऐ बिसरा दिया लाड करतां-करतां!
अर सासरै जावण रो दिन आवै जणै- 'थारै सागै ओ मैलद्यूं, थारै सागै बो मैलद्यूं।' भाभी नै कैवै- फलाणो करो, ढीकड़ो करो बाई खातर।' भाई नै दोड़ावै- 'अबार रा अबार आ चीज ल्या'र द्यो।' बापू नै कैवै- 'थांनै कीं ध्यान ई कोनीं! बाई सारू आ चीज ल्याणी है, बा चीज ल्याणी है।'
सो रामजी म्हाराज, आं दोन्यां री उमर बडी करज्यो। जणै ई सासरै अर पी'र में भदरक है। क्यूँकै सासरै में सार नीं सासू बिना, अर पी'रै में प्यार नीं मां बिनां।

आज रो औखांणो

सासूजी थे सांस ल्यो, म्हैं कातूं थे पीसल्यो।
सास-मां तुम सांस लो, मैं कातूं तुम पीस लो।
जो चालाक व्यक्ति फुसलाकर दूसरों को तो भारी और कष्टप्रद काम सौंपने की चेष्टा करे और स्वयं हलके काम की जिम्मेवारी संभालना चाहे तो यह कहावत उस पर कटाक्ष के रूप में कही जाती है।
प्रस्तुति : सत्यनारायण सोनी अर विनोद स्वामी, परलीका,
वाया-गोगामे़डी, जिलो- हनुमानगढ़ -335504
कानांबाती-9602412124, ९८२९१७६३९१
कोरियर री डाक इण ठिकाणै भेजो सा!
सत्यनारायण सोनी, द्वारा- बरवाळी ज्वेलर्स, जाजू मंदिर, नोहर-335523
email- aapnibhasha@gmail.com
blog- aapnibhasha.blogspot.com
राजस्थानी रा लिखारां सूं अरज- आप भी आपरा आलेख इण स्तम्भ सारू भेजो सा!
साभार- आपणी भाषा ब्लॉग

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रविवार, 15 फ़रवरी 2009

व्हाइट हाउस में खम्मा घणी

ओबामा प्रशाषन देगा हजारों नौकरियां
व्हाइट हाउस में खम्मा घणी
वाशिंगटन, १५ फरवरी। अब अमरीकी राष्ट्रपति भवन में खम्मा घणी और जोहार बाबूजी का सम्बोधन सुनाई पड़े तो आश्चर्य नहीं होगा।
ओबामा सरकार की कार्यकारी शाखा के लिए जारी नौकरियों के आवेदन में मारवाड़ी सहित भारत की छह क्षेत्रीय भाषाओ को मान्यता दी गई है।
मारवाड़ी, हरियाणवी और भोजपुरी जरूरी
अमरीकी सरकार में राजनीतिक पदों के लिए दुनिया भर की १०१ भाषाओ को चुना गया है। भारत की लगभग
२० क्षेत्रीय भाषाओ को जगह मिली है। इनमें अवधी, भोजपुरी, छत्तीशगढ़ी, हरियाणवी, मगधी तथा मारवाड़ी भाषा में से अक की जानकारी रखने वाले आवेदन कर सकेंगे। हालांकि भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल २२ भाषाओ में ये शामिल नहीं है।
राजस्थानी भाषा प्रेमियों ने अमेरिका में मारवाडी को मान्यता पर खुशी व्यक्त की है.
साभार- राजस्थान पत्रिका
प्रस्तुति- अजय कुमार सोनी
संपादक जनवाणी

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परलीका में रक्तदान शिविर

परलीका में रक्तदान शिविर
५१ यूनिट रक्त संकलित
परलीका, १५/०२/२००९

यहां के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में रविवार को मदर टेरेसा पर्यावरण संरक्षण एवं स्वास्थ्य संस्थान तथा राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के संयुक्त तत्त्वाधान में रक्तदान शिविर का आयोजित हुआ। शिविर में शिवशक्ति ब्लड बैंक, सिरसा की ओर से ५१ यूनिट रक्त संकलित किया गया।
शिविर का उद्घाटन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दीपलाना के प्रधानाचार्य तथा शिक्षाविद् भोजराज छिम्पा ने सर्वप्रथम रक्तदान कर किया। इससे पहले आयोजित उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि सरपंच खिराजराम धानिया, विशिष्ट अतिथि माईधन बैनीवाल, कुनणचंद शर्मा, डॉ. महेश शर्मा, बृजलाल कालवा, केशरीचंद सोनी तथा विशिष्ट रक्तदाता अमरसिंह नायक ने रक्तदान को पूजा समान बताया। डॉ. लक्ष्मीनारायण गुप्ता ने रक्तदान संबंधी भ्रांतियों का निवारण किया। शिविर में कई शिक्षक व साहित्यकार दम्पतियों ने सामूहिक रक्तदान किया। राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के कार्यक्रम अधिकारी पूर्णमल सैनी व संस्थान अध्यक्ष संदीप मईया ने आभार व्यक्त किया।

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बुधवार, 4 फ़रवरी 2009

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शुक्रवार, 26 दिसंबर 2008

नूंवै बरस री मोकळी-मोकळी मंगळकामनावां

नूंवै बरस री मोकळी-मोकळी मंगळकामनावां।

आपरा सगळा कारज पूरा होवै
घर में सातूं सुख बापरै।

नयै बरस भी नेह आपरो
गयै बरस री भांत राखियो।
रट्ठ निरा ई ताळ रो पड़ै
टाबरां री ख्यांत राखियो।।
- मोहन आलोक

बेली थारै आंगणै, उड़तो रेवै गुलाल।
बांध भरोटो हरख रो, ल्यावै नूंवो साल।।
-रामस्वरूप किसान

इणीज कामना साथै
जनवाणी परिवार


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शुक्रवार, 12 दिसंबर 2008

जनवाणी रो छठो अंक......

श्री सुगन साहित्य सम्मान- एक ओळखांण

श्री सुगन स्मृति संस्थान रा अध्यक्ष हरिमोहन सारस्वत आपरै पिता स्व. श्री सुगन चंद जी सारस्वत री स्मृति में सन् २००३ में राजस्थानी भासा, साहित्य अर संस्कृति रै विकास सारू 'श्री सुगन साहित्य सम्मान' री सरूआत करी। इण पुरस्कार में ५१०० रिपिया रोकड़ा, बखांण-पानो, नारेळ अर दुसालो भेंट कर्यो जावै। ओ सम्मान पैल-पोत फतेहपुर शेखावाटी रा डॉ. चेतन स्वामी नै वां री कथाकृति 'किस्तूरी मिरग' पर दियो गयो, पछै इण पोथी पर लेखक नै केन्द्रीय साहित्य अकादेमी पुरस्कार भी मिल्यो। राजस्थानी रा नामी कवि ताऊ शेखावाटी नै वां री काव्य-कृति 'मीरां-राणाजी संवाद' माथै भी ओ पुरस्कार दियो जा चुक्यो है। लारलो पुरस्कार कोलकाता में बस्या राजस्थानी री सेवा करण वाळा साहित्यकार अम्बू शर्मा नै दियो गयो। बरस २००७ रो पुरस्कार राजस्थानी भासा री संवैधानिक मान्यता सारू संघर्षरत युवा तुर्क अर प्रगतिशील रचनाकार परलीका वासी विनोद स्वामी नै दियो जासी। पुरस्कार समारोह १३ दिसम्बर २००८ नै सूरतगढ़ मांय होसी।


विनोद स्वामी-एक ओळखांण

विनोद स्वामी रो जलम १४ जुलाई १९७७ नै हनुमानगढ़ जिलै रै परलीका गांव में पिता श्री रामलाल अर माता श्रीमती चंद्रपति देवी रै आंगणै हुयो। राजस्थानी कविता सारू आपरो लगाव बाळपणै सूं ई रैयो है। आप एम.ए.(राजनीति विज्ञान अर राजस्थानी) अर पत्रकारिता अर जनसंचार में स्नातक उपाधि हासिल करी। बरस १९९९ सूं जुलाई २००२ तांईं राजस्थान पत्रिका सारू समाचार संकलन अर संपादकीय कार्यालय में काम अर 'आओ गांव चलें' स्तम्भ लेखन कर्यो।
राजस्थानी अर हिन्दी री मोकळी पत्र-पत्रिकावां में आपरी रचनावां छपै अर आकाशवाणी सूं प्रसारित हुवै। आपरी कवितावां रा अंग्रेजी, हिन्दी अर पंजाबी में भी ऊथळा हुया है। साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली री पत्रिका 'समकालीन भारतीय साहित्य अर 'इंडियन लिटरेचर' मांय भी आपरी रचनावां छपती रैवै। ५ सितम्बर, २००४ नै साहित्य अकादेमी री स्वर्ण जयंती रै मौके भोपाल रै भारत भवन में आयोजित 'नए स्वर' कार्यक्रम में आप राजस्थानी काव्य पाठ कर`र भारतीय साहित्य रा दिग्गजां सूं वाहवाही लूटी अर राजस्थानी री समकालीन कविता री निराली पिछाण कायम करी।
कवि-सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम अर जन-आंदोलनां में आपरी सक्रिय भागीदारी रैवै। राजस्थानी भाषा मान्यता आंदोलन री अलख जगावण सारू आप लगोतार जातरा करता रैवै। राजस्थान रै घणकरै गांवां-कस्बां अर सहरां में जाय`र आप जन-सभावां, स्कूलां अर कॉलेजां में पढेसर्यां री सभावां करी है अर मायड़भासा री महता समझाई है। मायड़भासा रै सम्मान सारू सब सूं लाम्बी दूरी री जातरा करण वाळा आप पैला मिनख है। राजस्थानी रा लगैटगै सगळा आधुनिक अर चर्चित कवियां री कवितावां आपरै कंठां है। मीठै गळै रा धणी विनोद स्वामी सुणावण लागै तो सुणनियां 'एकर और-एकर और' री मांग करता ई रैवै। विनोद स्वामी रै पांण राजस्थानी भासा अर साहित्य रो प्रचार-प्रसार पैली बार इत्ती गंभीरता सूं हुयो अर गांव-गांव में मायड़भासा सारू एक नूंवीं चेतना जागी।
श्री सुगन साहित्य सम्मान सूं पैली आपनै बरस २००३ मांय मरूधरा साहित्य परिषद, हनुमानगढ़ रो चंद्रसिंह बिरकाळी सम्मान भी मिल चुक्यो है। आपनै घणा-घणा रंग।

विनोद स्वामी री कवितावां

बाई
भूंदेड़ै चीणां रो आपरै मुंह में लोधो बणा`र
म्हारै मंुह में घाल देंवती बाई।
डोकी छोलण सूं म्हारी आंगळी कै होठ कट नीं जावै
छोल-छोल पोरी देंवती बाई।
काची निंबोळी सूं मुंह म्हारो खारो नीं हुवै
पाकी री पिछाण करांवती बाई।
मीठी अर फीकी कुणसी होवै डोकी
पत्तां री लकीर सूं पढ़ांवती बाई।
खुळेड़ी मतीरड़ी रा बीज सगळा काढ़`र
मीठो-मीठो पाणी प्यांवती बाई।
बाजरी री कुत्तर सूं डंकोळी जद चुगतो
दोनां रो भेद बतांवती बाई।
बेरो कोनीं होंवतो कच्छी उलटी-सुलटी रोए
सूंई करगे कछड़ी पिरां`वती बाई।
चप्पलां रो पग जद भूलतो हो मैं
सागी सागण पग में पिरां`वती ही बाई।
खेत री राह में गोदी जद मांगतो
सारी दूर प`धियां चढ़ांवती बाई।
जद-जद करतो कछड़ी नै गंदी
तातै-तातै पाणी सूं धुंवांवती बाई।
बात-बात सट्टै रूसतो बीं सूं
कसूर म्हारो होंवतो मनांवती बाई।
लदग्या बै दिन अब पाछा कोनीं आवै
पाछा तो ले आंवती जे होंवती बाई।
कीं चितराम
१
बाबै नै पसीनै सूं
हळाडोब होयोड़ो देख
मेह
बरसणो सीख लियो।
२
बाबै री धोती रै पांयचै नै
पून
गीत सुणा`र घूमर घाली
इण निरत पर
आखी रोही री नाड़ हाली।
टाबरपणो
१
मींगणां
गुलाब-जामण होंवता
ठीकरी पतासा
अकडोडिया आम
अर मींगणी दाख।
म्हारी दुकान रो समान
म्हे ई बेचता
अर म्हे ई बपरांवता।
म्हे खांवता
अकडोडियै नै आम ज्यूं
मींगणी नै दाख ज्यूं।
म्हे सो कीं खांवता
पण
साची तो आ है
म्हे कीं कोनीं खांवता।
२
स्कूटर आळी कोई चीज
कोनीं होंवती बीं में
पण बा ई रेस
बै ई सवारी
अर बो ई ठाठ आंवतो
पीढ़ै नै चलांवतां।
छात
छात माखर
दीखै तारा
बरंगा में थोबी
फसरी है चांद री
मनै हांसी आई
देख`र चांद री आ गत
जे धरती चालती नईं उण रात
तो चांद री हो जांवती
राम-नात सत।


राजस्थानी री पै'ली वेब-बुक 'इक्कीस'
राजस्थानी रा चर्चित कथाकार सत्यनारायण सोनी री वेब-बुक 'इक्कीस' रो लोकार्पण श्री सुगन स्मृति साहित्य सम्मान समारोह मांय हुसी। आ राजस्थानी री पै'ली वेब-बुक है अर इणनै तैयार करी है 'जनवाणी' रा संपादक अजय कुमार सोनी।

इंटरनेट पर छाई राजस्थानी

राजस्थानी भाषा अर साहित्य किणी भी मामलै मांय लारै नीं है। आधुनिक संचार माध्यमां में राजस्थानी री दखल भरोसैजोग है। सूचना क्रांति रै इण जुग में इंटरनेट पर राजस्थानी री मोकळी सामग्री उपलब्ध है। 'गूगल' मांय सरच करतां मोकळी वेबसाइटां अर ब्लॉग मिल्या जका राजस्थानी भासा, साहित्य अर संस्कृति रै प्रचार-प्रसार में आगीवांण है। आप भी देखो सा!

www.aapanorajasthan.org
www.janvaniparlika.blogspot.com
www.satyanarayansoni.blogspot.com
www.rajbijarnia.blogspot.com
www.dhartidhoranri.blog.co.in
www.eakataprakashan.blogspot.com
www.rajasthanirang.blogspot.com
www.prayas-sansthan.blogspot.com
www.marwad.org
www.maruwani.blogspot.com
www.dingalpingal.blogspot.com

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मंगलवार, 9 दिसंबर 2008

विनोद स्वामी नै 'श्री सुगन साहित्य' सम्मान

राजस्थानी भाषा अर संस्कृति रै विकास खातर श्री सुगन स्मृति संस्थान कानीं सूं आयोजित 'श्री सुगन साहित्य' सम्मान इण बार परळीका रा युवा साहित्यकार विनोद स्वामी नै दियो जासी। राजस्थानी भाषा री संवैधानिक मान्यता खातर संघर्ष अर साहित्यिक सेवा रै विनोद स्वामी नै १३ दिसम्बर नै सूरतगढ में संस्थान रै वार्षिक समारोह मांय ओ पुरस्कार दिरीजैला।

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ओम पुरोहित 'कागद' री कवितावां.....

मां-१


घर मांय बी
निरवाळौ घर
बसायां राखै
म्हारी मा।

दमै सूं
उचाट होयोड़ी
नींद सूं उठ'र
देर रात
ताणी
सांवटती रे'वै
आपरी तार-तार होयोड़ी
सुहाग चूनड़ी।

बदळती रे'वै कागद
हरी काट लागियोड़ा
सुहाग कड़लां
रखड़ी-बोरियै-ठुस्सी री
पुड़ी रा
लगै-टगै हर रात।

मा-२

साठ साल पै'ली
आपरै दायजै मांय आई
संदूक नै
आपरी खाट तळै
राख'र सोवै मा।

रेजगारी राखै
तार-तार होयोड़ी सी
जूनी गोथळी मांय
अर फेर बीं नै
सावळ सांव
ट'र
राख देवै
जूनी संदूक मांय।

पोती-पोतां सागै
खेलतां-खेलतां
फुरसत मांय कणां ई
काढ'र देवै
आठ आन्ना
मीठी फांक

चूसण सारू।

मा-३
मुं अंधारै
भागफाटी उठ'र
पै'ली
खुद नहावै
फेर नुहावै
तीन बीसी बर
स जूनै
पीतळ रै ठाकुर जी नै
जकै रा नैण-नक्स
दुड़ गिया
मा रै हाथां
नहावंता-नहावंता।

मोतिया उतरयोड़ी
आंख रै सारै ल्या

ठाकुर जी रो
मुंडौ ढूंढ'र
लगावै भोग
अर फेर
सगळां नै बांटै प्रसाद
जीत मांय हांफ्योड़ी सी।

मा- ४

टाबरां मांय टाबर
बडेरां मांय बडेरी
हुवै मा।

टाबरां मांय
कदै'ई
बडेरी
नीं हुवै मा।
पण
हर घर मांय
जरुर हुवै मा
रसगुल्लै मांय
रस री भांत।


एक निजर ओम पुरोहित कागद

जलम- ५ जुलाई १९५७, केसरीसिंह (श्रीगंगानगर)
भणाई- एम.ए. (इतिहास), बी.एड. अर राजस्थानी विशारद
छप्योड़ी
पोथ्यां- हिन्दी :- धूप क्यों छेड़ती है (कविता संग्रह), मीठे बोलों की शब्दपरी (बाल कविता संग्रह), आदमी नहीं है (कविता संग्रह), मरूधरा (सम्पादित विविधा), जंगल मत काटो (बाल नाटक), रंगो की दुनिया (बाल विविधा), सीता नहीं मानी (बाल कहानी), थिरकती है तृष्णा (कविता संग्रह)
राजस्थानी :- अ
न्तस री बळत (कविता संग्रै), कुचरणी (कविता संग्रै), सबद गळगळा (कविता संग्रै), बात तो ही, कुचरण्यां।
पुरस्कार अर सनमान- राजस्थान साहित्य अकादमी रो 'आदमी नहीं है' माथै 'सुधीन्द्र पुरस्कार', राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर कानीं सूं 'बात तो ही' पर काव्य विधा रो गणेशी लाल व्यास पुरस्कार, भारतीय कला साहित्य परिषद, भादरा रो कवि गोपी कृष्ण 'दादा' राजस्थानी पुरस्कार, जिला प्रशासन, हनुमानगढ़ कानीं सूं केई बार सम्मानित, सरस्वती साहित्यिक संस्था (परलीका) कानीं सूं सम्मानित।
सम्प्रति- शिक्षा विभाग, राजस्थान मांय चित्रकला अध्यापक।
ठावौ ठिकाणौ- २४, दुर्गा कॉलोनी, हनुमानगढ़ संगम ३३५५१२
कानाबाती- ०१५५२-२६८८६३
समूठ- ९४१४३-८०५७१

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रविवार, 30 नवंबर 2008

रावत सारस्वत साहित्य पुरस्कार-२००८ के लिए प्रविष्ठियां आमंत्रित


रावत सारस्वत साहित्य पुरस्कार-२००८ के लिए प्रविष्ठियां आमंत्रित


संक्षिप्त नियम-शर्तें


राजस्थानी भाषा के ख्यातनाम साहित्यकार स्व. रावत सारस्वत के नाम पर स्थापित पुरस्कार के संदर्भ में सूचित करते हुए परम हर्ष हो रहा है कि -
रावत सारस्वत साहित्य पुरस्कार-२००८ हेतु प्रविष्ठियां आमंत्रित हैं।
राजस्थान निवासी कोई भी लेखक अपनी किसी एक राजस्थानी पुस्तक को पुरस्कार प्रविष्ठि के रूप में भिजवा सकता है। राजस्थान निवासी से अभिप्राय राजस्थान में जन्म लेने वाला या विगत दस वर्षों से लगातार राजस्थान में निवास करने वाला अभिप्रेत है।
पुस्तक वर्ष २००३, २००४, २००५, २००६, २००७ में छपी होनी चाहिए।
पुस्तक कम से कम ८० पृष्ठ की डिमाई साइज में होनी चाहिए।
पुस्तक किसी भी विधा में हो सकती है।
प्रविष्ठि रूप पुस्तक की पांच प्रतियां प्रेषित करनी होगी। (तीन पुस्तकें तीन निर्णायकों के लिए एक-एक, एक पुस्तक स्व. रावत सारस्वत के सुपुत्र सुधीर सारस्वत के लिए व एक पुस्तक संस्थान के लिए आवश्यक होगी।)
पूर्व वर्षों में पुरस्कार हेतु भेजी गई पुस्तक इस वर्ष पुन: शामिल नहीं हो सकेगी।
लेखक को अपने दो पासफोर्ट साइज फोटो के साथ अपना जीवन परिचय व पुरस्कार नियमांे की मान्यता की सूचना भी प्रेषित करनी होगी। (घोषणा प्रारूप नीचे प्रकाशित है।)
प्राप्त प्रविष्ठियों का मूल्यांकन समिति द्वारा मूल्यांकन करवाकर सर्वश्रेष्ठ घोषित किसी एक कृति पर पुरस्कार दिया जाएगा।
मूल्यांकन समिति में तीन अलग-अलग नगरों के राजस्थानी भाषाविद सदस्य होंगे। जिनसे अलग-अलग मूल्यांकन अंकों के आधार पर करवाया जाएगा और कुल योग के अंकों की अधिकता ही श्रेष्ठता का मापदण्ड होगा।
निर्णय पूर्णतया निष्पक्ष होगा और तीनों निर्णायकों को भी निर्णय होने तक एक-दूसरे के विषय में पता नहीं होगा।
निर्णायकों के पास विषय प्रतिपादन अभिव्यक्ति शिल्प व भाषा शैली के चार भाग २५-२५ अंक के मानकर कुल १०० अंकों का प्रपत्र, प्राप्त पुस्तकों की एक-एक प्रतियों के साथ भिजवाया जाएगा। पुस्तकें निर्णायकों को वापस नहीं करनी होगी व निर्णय पत्रक भरकर भेजना होगा। इस ढंग से तीनों निर्णायकों से प्राप्त पत्रक से अंक जोड़े जाएगें व कुल ३०० अंकों के योग का अंतिम निर्णय पत्रक तैयार किया जाएगा। कुल योग में सर्वाधिक अंक प्राप्त कृति के नाम पुरस्कार घोषित किया जाएगा।
मान-सम्मान के अलावा पुरस्कार की राशि ५१०० रु. नगद होगी।
राशि ५१०० रुपये से ज्यादा की राशि का कोई भी दुसरा पुरस्कार प्राप्त कर चुकी पुस्तक इस पुरस्कार हेतु शामिल नहीं हो सकेगी।
यह पुरस्कार वर्ष २००६ से रावत सारस्वत के सुपुत्र श्री सुधीर सारस्वत के सौजन्य से प्रतिवर्ष दिया जाएगा। जिसकी संयोजकीय भूमिका रावत सारस्वत स्मृति संस्थान, चूरू निभाएगा।
पुरस्कार की प्रविष्ठियां २५ दिसम्बर, २००८ तक दुलाराम सहारण, सचिव, रावत सारस्वत स्मृति संस्थान, गांधीनगर, पो. चूरू - ३३१ ००१ के पते पर पहुंच जानी चाहिए। अधिक जानकारी के लिए मो. नं. ९४१४३ २७७३४ पर सम्पर्क किया जा सकता है।
संस्थान द्वारा घोषित अंतिम निर्णय सभी प्रतिभागियों को मान्य होगा। इस विषय में कोई भी वाद स्वीकार्य नहीं होगा।
सादर।

(भंवरसिंह सामौर) (दुलाराम सहारण)
अध्यक्ष सचिव


नैम-मानता घोसणा

सेवा मांय,


अध्यक्ष/सचिव
रावत सारस्वत स्मृति संस्थान
चूरू-३३१००१


विसै : 'रावत सारस्वत साहित्य पुरस्कार-२००८' सारू प्रविष्ठि भेळी करण अर नैम मानता री हामळ बाबत।


मानजोग,


म्हैं---------------------निवासी ........................................... म्हारी पोथी ................................... री पांच पड़तां, म्हारो परिचै अर दो फोटूवां साथै ''रावत सारस्वत साहित्य पुरस्कार-२००८'; री प्रविष्ठि सारू भिजवावूं हूं।
म्हैं घोसणा करूं हूं कै आ' पोथी म्हारी मौलिक है अर इण माथै कोई दूजो ५१०० रिपियां सूं बेसी रो इनाम कोनी मिल्यो थको।
संस्थान रा नैम-कायदा देख लिन्हां अर म्हैं उणां नै मानण री घोसणां करूं। म्हनैं संस्थान रो छेकड़लो निर्णय मंजूर होसी।


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शुक्रवार, 21 नवंबर 2008

हनवंतसिंघ राजपुरोहित रा ई-टपाळ अजय रै नाम........

प्रिय अजय,
आज गुगल मांय सर्च करता थांरौ ब्लोग मिळ्यौ, बांच'र मन घणौ राजी होयो.
म्हें ईं लारला घणां दिनां सूं राजस्थांनी भासा रै वास्तै किं करण री कोशीश कर रह्‌यौ हूं. राजस्थांन सूं दुर मुंबई अर लंदन मांय हुवण सूं म्हें कोई खास नीं कर सक रह्‌यौ हूं.
आशा है आप म्हारै टच मांय रह्‌वौला अर आपां साथ मिळनै सैयौग सूं काम करांला.
म्हारी वेबसाईट : www.marwad.org
आपरौ,

हनवंतसिंघ राजपुरोहित
मरूवाणी संघ
Mobile (India) 0091 98696 07933
Mobile (London) 0044 7965044556
ई-टपाळ hanvant@marwad.com
Web www.marwad.org
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मुजरौ सा!

आपरौ ई-टपाळ बांच'र लागौ, कै लारला १०-१२ बरसां री म्हारी शोध पुरी व्ही. म्हें कोई एड़ौ मिनख ढुंढ रह्‌यौ हौ जिणरा विचार म्हां सूं मिळै. आपसूं अर राजेंद्रजी सूं बात करनै लागौ कै म्हारी शोध पुरी व्हेगी.

1947 सूं पैली राजपुतानौ अंगरेजां रै गुलाम नीं हौ (अजमेर नै छोड़'र), अर अंगरेजां रै गया पछै 1947 मांय राजपुतानै रौ विलय हुयौ. उण विलय रै साथै आपणी गुलामी ईं चालु होगी. आपणी भासा बोलण रौ हक अर इधकार खतम होग्यौ.

आज भारत सरकार रै सांमै कड़क जवाब देवणवाळौ अर गुजर समाज ज्यूं आंदोलण करण वाळा चावै. लारला 60 बरसां मांय आपणौ आंदोलण सरकार री मनवार करण में ईं लाग्यौ रह‌यौ. आंपा कोई भीख नीं मांग रह्‌या हौ, आंपा आपणै हक री बात कर रह्‌या हौ. सिधी आंगळी सूं कदै ई घी नीं निकळ्या करै.

आज सरकार आपणी आवाज सूण भी लेवै तौ राजस्थांनी नै राजस्थांन री दूजी राजभासा बणा'र छोड देवैला. जिणसूं शिक्षा अर कांम काज मांय तौ राजस्थानी चालण सूं रह्‌यी. सांवैधानिक मान्यता इज एक रस्तौ नीं है, राजस्थांन रै हर सरकारी काम-काज, ST बसां मांय, रेल्वे स्टेशनां पर अर हर एक दुकान रा बोर्ड राजस्थांनी भासा मांय हुवणा चावै.

लारला 60 बरसां मांय आपणी भासा रौ घणौ नुकसाण हुयौ है, हिंदी राजस्थांन री मुख्य भासा हुवण सूं राज्स्थांनी भासा मांय नुंवा सबदां रौ जलम नीं व्हे सक्यौ. साथै-साथै हिंदी भासा रा घणां सबद राजस्थांनी भासा मांय घुस जावण सूं आ हिंदी री बोली लागण लागी.

म्हारौ अर मरुवाणी संघ रौ पुरौ-पुरौ सैयोग मायड़ भासा वास्तै है, म्हें बेगौ ईं राजस्थांन आवण रौ plan बणावूंला.

जै राजस्थांन!
जै राजस्थांनी!

आपरौ,
हनवंतसिंघ राजपुरोहित
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राजवाड़ी राजस्थांन (Royal Rajasthan)
मायड़भासा, अर राजस्थांन रा साचा हेताळु (True lover of state, language and culture)

बीकानेर रा महाराजा गंगासिंघजी राज री नौकरी मांय पैल हमेशां देसी लोगां री राखता. नौकरी सारु टाळती बगत महाजन राजा हरिसिंघजी गंगासिंघजी री कांनी सूं इन्टरव्यू मांय बैठता अर उमेदवार नै औ दूहौ बांचण सारु केह्ता -

पळळ पळळ पावस पड़ै, खळळ खळळ नद खाळ ।

भळळ भळळ बीजळ भळै, वाह रे वाह बरसाळ ॥

इण दूहै नै बोलतां राजस्थांन सूं बारला मिनख 'खलल खलल' करण लागता. तद वांनै जावाब दिरीजतौ - "अठै रा लोग-बाग फगत राजस्थानी जाणै अर समझै अर म्हांनै वां सूं ईं काम पड़ै. इण वास्तै राजस्थानी रा जाणकार लोगां नै ईं इण राज मांय नौकरी मिळसी, दूजां नै नीं."

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आपरौ,

MARUWANI SANGH

0091 98696 07933

+ hanvant@marwad.com

Web www.marwad.org

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राजस्थांनीयां नै ऒळख रौ हेलौ

जे आप राजस्थांनी हौ तौ मायड़ भासा राजस्थांनी सूं हेत राखौ

आज आपां जिकौ किं हां उण होवण रै लारै अठै री जमीन, अठै री संस्क्रती-संस्कार अर अठै रौ इतियास है. इण सैं चिजां सूं मिनख नै जिकौ जोड़ै वा है मायड़ भासा, आपणी भासा.

कांई थे जाणौ हौ ?

राजस्थांनी भासा कुळ चवदै बोलियां सूं बणी है. जिंयां मारवाड़ी, मेवाड़ी, हाड़ौती, ढुंढाड़ी, गोड़वाड़ी, गुजरी, मेवाती इत्याद. घणी बोलियां भासा रै सिमरिध होवण री प्रतीक है.

आजादी सूं पैली 'डिंगल' रै रुप में ૫૪૪ रजवाड़ा मांय आ बिल्कुल समान ही. आजादी रै पछै शिक्षा रौ माध्यम राजस्थांनी नीं व्हिया सूं इण नै बाचण अर लिखण रा अभ्यस्त नीं व्है सकिया. पण एकर अभ्यास सरु करियां पछै आ सब सूं सरळ अर मोवणी लागै. राजस्थांन रा सारा गांवां मांय आ इज बोलीजै.

राजस्थांनी भारतीय भासावां मांय तीजी अर संसार री भासावां मांय नवमी जगां राखै. केन्द्रिय साहित्य अकादमी जिण २२ भासावां नै मांनता दे राखी है, उण मांय राजस्थांनी ईं सांमळ है, पण सांवैधानीक मांनता नीं मिलण सूं प्रशासनिक अर राजकाज रै कांमा मांय अर भारत सरकार रै नोटां माथै आ नीं छप सकी.

राजस्थांनी भासा सूं निकळ्यौड़ी गुजराती भासा संसार री दसमी सबसूं म्होठी बोली जावण वाळी भासा है.

राजस्थांनी भासा मांय एक लाख सूं बेसी हस्तलिखित ग्रंथ बिखरियोड़ा पड्या है. अबार तांई ढाई लाख सबदां रौ विशाळ राजस्थांनी सबद कोस, अंस्सीहजार राजस्थांनी केहवतां अर मुहावरां रा केई छोटा-म्होठा कोश निकळ चुकिया है.

राजस्थांन भारत रौ सबसूं बड़ौ राज्य है अर राजस्थांनी भारत रै सबसूं बड़ा भाग मांय बोली जावण वाळी भासा है.

राजस्थांन, हरियाणा, मध्यप्रदेश (माळवा), उत्तर गुजरात केई भाग, पाकिस्तान (सिंध अर पंजाब रा घणकरा भाग), कश्मिर (गुजरी), अपगांनिस्थांन (गुजरी), चेकोस्लाविया (गुजरी), इरान-ईराक (गुजरी), चीन (गुजरी), तजाकिस्तान (गुजरी) अर केई दखिण एशिया रै देशां री (गुजरी) राजस्थांनी मायड़भासा है.

अंगरेजी राज मांय कश्मिर अर अपगानिस्थांन री गुजरी भासा नै राजस्थांनी भासा रै रुप मांय जणगनणा मांय देखावता पण राजस्थांनी नै मान्यता नीं हुवण सूं इणनै हिंदी री बोली रै रुप मांय प्रस्तुत करै है.

भारत सरकार नै डर है कै संसार री इत्ती बड़ी भासा नै मान्यता दे दी जावै तौ हिंदी भासा रा जे झुठा आंकड़ा पेश करै है अर हिंदी नै विश्व री तिजी सबसूं बड़ी बोली बतावै है वा बात झुटी पड़ जावै. इण कारण राजस्थांनी नै हिंदी री बोली बता'र हिंदी रौ विस्तार बतावणी चावै.

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आपरौ,

MARUWANI SANGH

0091 98696 07933, 0044 ७९६५०४४५५६

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अजय,
Thanks for email. काल आपरै पापा अर राजेन्द्रजी सूं बात करनै मन घणौ राजी हुयौ. आपरी जाणकारी रै वास्तै म्हें मरुवाणी संघ अर प्रताप सेना रौ अध्यक्ष हूं.
मरुवाणी संघ री थापना म्हें कोलेज रा दोस्तां नै साथै लेय'र सन ੧੯੯੯ मांय करी ही. जिणरौ उद्देश्य राजस्थांनी भासा नै राजस्थांन री प्रथम अर एकमात्र राजभासा बणावण री ही. म्हारौ मानणौ है, कै UP, बिहार वाळा री भासा हिंदी नै कोई हक कोनी कै राजस्थांन मांय जबरदस्ती रौ हक जमावै. आज मरुवाणी संघ रै सदस्यां मांय चार्टर्ड अकांउन्टंट सूं लेय'र छोटा-मोटा वौपारी है तौ इण मांय मुंबई सूं गुवाहाटी तांई रौ मानखौ ईं है.
प्रताप सेना री थापना ईं राजस्थांन अर राजस्थांनीयां मांय जाग्रती जगा'र एक राजनैतिक पार्टी बणावण री है. कांम मांय अळुझण अर राजस्थांन सूं दुर रह्‌वण रै कारण हालतांई कोई खास कांम नी कर सक्या हां.
आशा है आपा साथै मिळ'र राजस्थान अर राजस्थानी रै हक री जंग नै इणरै सिरै तांई लेय जावांला.
आपरौ,
हनवंतसिंघ राजपुरोहित
रूवाणी संघ

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